मंगलवार, 12 मई 2020
कभी लिखा गया था।
सचिन-२
रोटी और राजनीति
शनिवार, 9 मई 2020
सेनापतियों के लिए उसका सैनिक परिवार की तरह होता है
गुरुवार, 7 मई 2020
सेनाओं के नायक रुपहले पर्दे पर नहीं आते हैं, लेकिन उनकी विजय गाथा उन्हें सर्वकालिक महानायक बनाते हैं ..
गुरुवार, 30 अप्रैल 2020
ऋषि कपूर और इरफान का यूँ चले जाना बहुत कुछ खाली कर गया ...
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020
सचिन.... सचिन.... सचिन...
शुक्रवार, 23 अगस्त 2019
शुभ जन्माष्टमी
शुभ जन्माष्टमी
आज जन्माष्टमी है । भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन । एक हिन्दू होने के नाते श्री कृष्ण मेरे आराध्य हैं और मैं इनका अनन्य उपासक हूँ ।
यह एक महज मान्यता ही नहीं है की भगवान श्री कृष्ण का जन्म आज की ही तिथि में हुआ था अपितु ये विश्वास है कि भगवान श्री कृष्ण की उपस्थिति ब्रम्हाण्ड के रज से लेकर कण तक है और सृष्टि के अनन्त काल तक रहेगी ।
यह विश्वास वैसा ही है जैसे रात के बाद भोर हो जाने को होता है । सूर्य का उदय पूर्व दिशा में ही होने को होता है और जैसे अमावस के बाद चंद्र का पूर्ण हो जाने को होता है।
मानवीय जनभावनाओं, आस्था,विश्वास और कण-कण में विराजित श्री कृष्ण के ही रूप हैं राम। भगवान श्री राम ।
भगवान श्री राम के अस्तित्व के होने या ना होने का प्रश्न ठीक वैसे ही विद्वेष और कलुषपूर्ण है जैसे जल विहीन धरती में सृष्टि के सृजन की कल्पना कर जाना है । जैसे सूर्य के प्रकाश बिना धरती पर जीव के बचे रहने की कल्पना कर जाना है।
लेकिन विडम्बना यह है कि इस चराचर जगत के अंतःकरण में स्थापित भगवान श्री राम के अस्तित्व के विद्यमान होने को प्रमाण की आवश्यकता है ।
क्या मानव शरीर में प्राण के विद्यमान होने और ना होने का भी प्रमाण मांगा जाता है ?
क्या धरती के रिक्त स्थानों में वायु के होने या न होने का भी प्रमाण मांगा जाता है ?
एक भक्त द्वारा आप सबों को शुभ जन्माष्टमी 🙏
बुधवार, 29 मई 2019
रटे हुए खिलाड़ियों के नाम और उनके खेल
2003-04 में प्रतियोगिता दर्पण पत्रिका 22 रुपये में और सामान्य ज्ञान दर्पण 18 रुपये में उपलब्ध हो जाती थी ।
साल के चार ग्रैंड स्लैम के विजेताओं के नाम मैं इसलिए रट लिया करता था ताकि परीक्षा में पूछे जाने पर उसका जवाब दिया जा सके ।
अमूमन ये होता है कि जिस खेल के खिलाड़ियों के नाम आपको याद रहते हों वो खेल आपको धीरे-धीरे प्रिय लगने लगता है ।
वो दौर फ़ेडरर का था, 237 सप्ताह तक शीर्ष पर बने रहने के दौर, वीनस बहनों का पराक्रम तब भी था पर किम क्लस्टर्स और शारापोवा के आने के बाद इस खेल में रंगत और भी आ गई थी ।अन्ना कुर्निकोवा का जो जलवा था उसका अपना अलग ही लेवल था।
अब नडाल आ चुके थे और ये दौर नडाल और उनके क्ले कोर्ट पर बिखरते हुए जलवे का दौर था । फ़ेडरर साल में होने वाले बाकी तीन ग्रेंड स्लैम तो जित लेते थे लेकिन क्ले कोर्ट अब अबूझ पहेली थी उनके लिए । घास के मैदान का अजेय योद्धा फ़ेडरर (8 विम्बलडन ), मिट्टी के मैदान पर कहीं टिक नही पा रहे थे । अब नडाल, फ़ेडरर के स्पीड ब्रेकर थे ।
समय के साथ जीत के रफ़्तार पर इनके शारिरिक चोट हावी होते रहे और क्रमशः इनकी रफ़्तार भी कमती रही ।
20 ग्रेंड स्लैम के साथ फ़ेडरर इस खेल में अपना कृतिमान स्थापित करने में सफल तो रहे लेकिन नडाल ने उन्हें क्ले कोर्ट में हमेशा परेशान किया । नडाल के 17 ग्रैंड स्लैम में से एक आध ग्रैंड स्लैम (फ्रेंच ओपन) भी अगर फ़ेडरर के झोले में आते तो फ़ेडरर की विजयी पताका को ये ग्रैंड स्लैम स्वर्ण जड़ित रत्नों सा सुशोभित करता।
खैर! अब ये दौर जोकोविच का है । इस दौर को जोकोविच ने अपने रंग में ढालने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा है । 15 ग्रैंड स्लैम का विजयी जोकोविच अपनी विजय पताका लिए अग्रसर है और शायद कई सालों बाद जोकोविच ऐसा खिलाड़ी बन जाए जिसने दो बार साल के चारों ग्रैंड स्लैम जीता हो।
सरेना के बारे में फ़िर कभी।
:- रामकृपाल
शनिवार, 25 मई 2019
चुनाव, परिणाम और आत्ममंथन
चुनाव परिणाम आ गए हैं और हारी हुई पार्टियों में आत्ममंथन का दौर शुरू है । ये चुनाव कई पक्षों के बीच लड़े जाने के बावजूद भी अन्ततः दो पक्षों की लड़ाई बन गई थी । दूसरे शब्दों में भाजपा इसे "सभी दल बनाम बीजेपी " की लड़ाई भी कह रही है ।
पिछले पाँच सालों में लागू किए गए योजनाओं और उन्हें धरातल पर लाने में सफल, सत्तासीन बीजेपी जीत की आकांक्षा लिए मजबूत दावेदार के रूप में चुनावी समर में उतरी ।
बीजेपी का सफल मैनेजमेंट, प्रधानमंत्री पद के दावेदार, प्रमुख नेताओं और बेजेपी के मीडिया सेल ने इस पार्टी द्वारा किए गए कार्यों की उपलब्धि और विपक्षी पार्टियों की कमियों को देश मे रहने वाले अंतिम पायदान के लोगों तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा।
वहीं विपक्ष के लिए एकत्र हुई पार्टियां, पिछले पाँच सालों से सत्ता में रही बीजेपी के कार्यों की त्रुटि को खोजने और उससे उपजे असंतोष को लोगों तक पहुंचाने में असमर्थ रहीं ।
जहाँ बीजेपी राष्ट्रवाद, गरीब और गरीबी से लड़ने वाली योजनाएं, सबका साथ और सबका विकास ,विदेशनीति, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और देशहित के मुद्दे को लोगों के दिलोदिमाग में भरने में सफल रही, वहीं विपक्षी पार्टियां चुनावी मेनिफेस्टो के कवर पेज के डिजाईन और "चौकीदार चोर है" के नारे लगवाने में लोगों के भरोसे को खोती रही ।
इस बीच आर्थिक नीति और किसानों की समस्यओं के मुद्दे को भी लोगों ने बाकी और योजनाओं के कारण दरकिनार कर दिया ।
विपक्षी दलों द्वरा चुनावी सभाओं में बड़े नेताओं के मीडिया ट्रायल से इमेज मेकिंग की कोशिश को नेताओं के गिरते भाषा के स्तर ने सफल नहीं होने दिया ।
अंततः बीजेपी गरीबी से लड़ने के मुद्दे, भ्रष्टाचार मुक्त शासन, विदेश नीति और राष्ट्रवाद के मुद्दे को लोगों तक कनेक्ट करने में सफल रही और प्रचण्ड बहुमत से विजयी हुई ।
कुल मिलाकर ये चुनाव विकास के मुद्दे और तुस्टीकरण की राजनीति से दूर जाकर लड़ी और जीती गई ।
वहीं वीपक्षी पार्टियों ने सरकार की कमियों को गिनाने के बजाय नरेंद्र मोदी को हराने पर अपना ध्यान केंद्रित रखा और जनता के सरोकार के मुद्दे को उनतक पहुंचाने में असफल रही ।