शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

सचिन.... सचिन.... सचिन...

सचिन... सचिन.....सचिन....

क्रिकेट ने कई महानायकों को जना है, लेकिन सचिन जैसा कोई दूसरा नहीं । नब्बे के दशक में जब क्रिकेट की लोकप्रियता भारत में लगातार कम हो रही थी तब एक नए सूर्य के साथ क्रिकेट का एक नया सवेरा आया, नाम था सचिन रमेश तेंदुलकर ।

अपने डेब्यू मैच में ही सोलह साल के सचिन ने विरोधी टीम के खिलाड़ियों को यह संदेश प्रेषित कर दिया था कि वह केवल क्रिकेट खेलने नहीं आया है, वो यहाँ क्रिकेट रचने आया है जिसे शताब्दियों तक पढा जाएगा । 

बिना मूँछ के इस बल्लेबाज ने जब मुस्ताक अहमद के एक ही ओवर में दो छक्के जड़े थे तो मोहम्मद कादिर ने यह कहा था कि "बच्चे को मार कर क्या दिखाना चाह रहे हो मेरे गेंद को छू कर तो देखो" और अगले ही ओवर में जब उस मूढ़ गेंदबाज को लगातार तीन छक्के जड़ दिए गए तो यह प्रमाणित हुआ था कि क्रिकेट में मूँछों का होना या नहीं होना मायने नही रखा जाता है । 

सचिन का सूर्य अभी ठीक से दीप्तमान हुआ भी नहीं था कि अजेय रहने वाले ऑस्ट्रेलियन टीम और उनके खिलाड़ियों के सपने में सचिन के रहस्यमय शॉट्स और उससे निजात पाने के सपने आने लगे । 

सचिन के शानदार शॉट्स का जादुई तिलस्म अब धीरे धीरे अभेद्य हो रहा था । कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव, पुल, हुक, फ्लिप का प्रमेय विरोधियों के लिए अनसुलझा सवाल बनता जा रहा था । 

समय बढ़ता गया रिकॉर्ड बनते गए । खेल-खेल में सचिन के बल्ले से रिकॉर्ड की इतनी कहानियाँ बन गई है कि क्या याद रखा जाए और किसे भुला जाए है ये याद नहीं आता है ।

इन सब के बीच याद आता है की शोएब के तेज गेंद पर पॉइंट के ऊपर जब सचिन ने छक्का मार दिया था तो सोएब केवल रोया नहीं था, बस!

याद आता है कि शैन वार्न रोते रोते यह स्वीकर कर लेता है कि उसके फिरकी के जादुई तिलिस्म को इस दुर्धष खिलाड़ी ने तोड़ मरोड़ कर रख दिया है । 

याद आता है कि वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जब भारत, ऑस्ट्रेलिया से हार गया था और सचिन को मैन ऑफ द सीरीज घोषित किया गया था लेकिन सचिन को जैसे उस ट्रॉफी प्राप्त करने की कोई खुशी ही नहीं हुई थी । 

याद आता है कि खेल के अंतिम पड़ाव पर खड़े इस महान खिलाड़ी का जब इसका सपना साकार हुआ और इसने विश्व कप के विजयी ट्रॉफी को अपने छाती से लगा कर इस तरह फफक फफक कर रोया था जैसे बिछड़े हुए बेटे से मिलकर माँ गले लगा कर रोती हैं । 

कितना कुछ कहा जाए ! कहने को इतना कुछ है कि आपलोग पढेंगें ही नहीं । 

ख़ैर ! कहना बस इतना है कि सचिन ने क्रिकेट और क्रिकेट प्रेमियों को बस दिया है । बेहिसाब, बेहिचक,बेशर्त । लिटिल मास्टर सचिन को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं । आपकी कृति अजेय और अविस्मृत रहे । 

जिंदाबाद ...

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