एक सैनिक को उसके दिए हुए उत्कृष्ट सेवा के लिए जब किसी सैन्य दल का सेनापति घोषित किया जाता है तो उसके पीछे सेवाकाल में प्राप्त अनुभवों और सैनिक सम्वेदनाओं का विशाल सागर साथ चलता रहता है ।
एक सेनापति सेनाओं का नायक कम और अपने सैनिक परिवार का मुखिया ज्यादा होता है । वो अपने सैनिकों के अंतर्मन से उठते भावनात्मक तरंगों के सम्प्रेषण को पढ़ने में निपुण होता है जिसकी अभिव्यक्ति में वह कभी सख्त, कभी नर्म और कभी भावुक होता रहता है ।
लेकिन एक सेनापति अपने सैनिकों के हितार्थ, निःसंकोच भाव से तत्क्षण ही सब कुछ छोड़ने के लिए सदैव तत्तपर रहता है ।
"कैप्टन ब्रेट क्रोजियर" ऐसे ही सेनापतियों के फेरहिस्त में विराजने वाले सेनापति हैं । युद्धक हैलीकॉप्टर उड़ाने से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले ब्रेट क्रोजियर को उनके उत्कृष्ट प्रतिभा के लिए अमेरिकन परमाण्विक विमान वाहक पोत थियोडोर रूजवेल्ट का कप्तान बनाया गया था ।
लेकिन ब्रेट क्रोजियर को जब यह ज्ञात हुआ कि कोरोना महामारी के प्रचंड प्रकोप ने रूजवेल्ट पर पदस्थापित सैनिकों को अपने पाश में जकड़ना शुरू कर दिया है और उनके किये हुए अनुरोध का समुचित संज्ञान नहीं लिया जा रहा है तो उन्होंने अपने कैरियर की परवाह किये बिना सैनिकों की जान बचाने के लिए वो सब किया जो उन्हें एक कुशल सेनापति बनाता है ।
बाद में ब्रेट क्रोजियर द्वारा उठाए गए कदमों को असंवैधानिक करार देकर उन्हें पदमुक्त कर दिया गया । लेकिन जब वो अपने जहाज को छोड़कर जा रहे थे तो सैनिकों की कतारबद्ध पङ्गतियाँ, तालियों की गड़गड़ाहट और सैनिकों की गीली आंखों द्वारा दी गई विदाई यह कहने को पर्याप्त था कि ब्रेट क्रोजियर सर्वसिद्ध कुशल सेनापति रहे थे जिन्होंने अपने सैनिकों के हितों में अपने कैरियर तक को दांव लगा दिया था ।
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