साल 2016 का था । शरापोवा पर टैनिस खेलने का प्रतिबंध लगाया जा चुका था ...
17 साल में ही विम्बलडन जीतकर इतिहास में अपने नाम को दर्ज कराने वाली मारिया की ख्याति का दीप्त अब मद्धम हो रहा था ।
प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया था । मारिया ने अपनी गलती को सहजता से स्वीकार करते हुए यह कहा कि मुझसे गलती हुई है । विश्व टैनिस महासंघ द्वारा जारी किए गए प्रतिबंधित दवाओं के नाम को पढ़ना मेरी सर्वप्रमुख जिम्मेदारी थी । ख़ैर ! अब जो है वो आप सबों के सामने है । मैं वापस टैनिस मैं लौटूंगी "आई बिलीव दैट" । ऐसे ही विपरीत परिस्थितियों में मारिया का जुझारूपन स्वभाव, उन्हें बाँकीयों से अलग बनाता था ।
ये मारिया का अक्खड़पना ही था की जिस खिलाड़ी को खेलते देख कर टैनिस का सफर उन्होंने तय किया था उन्हें ही हरा कर शरापोवा ने अपना पहला ग्रैंड स्लैम टाइटल जीता था ।
एक सकक्षात्कार के दौरान शरापोवा से पूछे जाने पर की क्या आप सेरेना विलियम्स से प्यार करती हैं ? उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था कि मैं सेरेना को सम्मान की नजरों से देखती हूँ । ऐसा भला कैसे हो सकता है कि जिस खिलाड़ी के सामने मेरे जीत का रेशियो 19-02 का है उसे मैं प्यार की नजरों से देख सकूँ !
समय के कुचक्र ने टैनिस इतिहास को हमेशा रौंदने का सफल प्रयास किया है । यहाँ दो महान खिलाड़ी एक दूसरे के चिरप्रतिद्वंद्वी होते रहे हैं । सेरेना और शरापोवा का भी यही हाल रहा है ।
अपने धुर प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी सेरेना को 17 साल की शारापोवा ने जब विम्बलडन के फाइनल में आश्चर्यजनक रूप से हराया था तो सेरेना को प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन के अंतिम क्षणों तक यह विश्वास नही हो रहा था कि वो हार गई हैं । शरापोवा कहतीं हैं कि सेरेना रो रही थीं और उन्होंने मुझे पलट कर देखना भी मुनासिब नहीं समझा था । उन्हें इस बात से दिक्कत नहीं थी कि मैं जीत गई थी । उन्हें इस बात से दिक्कत थी कि एक नवसिखुवा खिलाड़ी ने सरेना जैसे स्थापित खिलाड़ी को हरा दिया था ।
शरापोवा आगे कहतीं हैं, उस समय मेरे पास हारने को कुछ नहीं था लेकिन सरेना के पास बहुत कुछ था ...
मारिया....
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