रविवार, 15 जनवरी 2023

सेना दिवस...

देश के पश्चिम से लेकर नैत्रेय कौण तक, दक्षिण से लेकर अग्नि कौण तक और अग्नि कौण से बंगाल की खाड़ी तक फैले हुए विशाल सागरीय तट की सीमा हो। वायव्य कौण में फैला हुआ दग्ध रेगिस्तान हो या शितलहरों को समेटे हुए उत्तर में अवस्थित हिमालय की अगम्य बर्फीली चोटियाँ हो, हमारी शस्य श्यामला धरती की सम्प्रभुता को अक्षुण्य रखने हेतु भारतीय सेना अपने प्राणों को बलिदान करने के लिए सर्वदा आतुर रहती है। 

विश्व युद्ध इतिहास का हर पन्ना साक्षी है की विश्व की सबसे बड़ी स्वेक्षिक सेना कहलाने वाली भारतीय सेना अपने अतुलित साहस औऱ निपुण युद्धकौशल के कारण युद्धभूमियों में विजयश्री के उतुंग ध्वज को गाड़ते आये हैं। इनके अतुलित साहस की गाथा तब भी गाई जाती है जब अंग्रेजों ने प्रथम विश्वयुद्ध में अपनी अस्मिता इन्हीं सेनिको के पराक्रम से बचा पाया था। 

इस देश मे सेनाओं का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन है। रामायण से लेकर महाभारत काल तक,मौर्य से लेकर गुप्त काल तक, चोल से लेकर चालुक्य के होते हुए वर्तमान की भारतीय सेनाओं के अतुलित साहस के सम्मुख आक्रांताओं ने अपने साहस का परित्याग कर पराजय को ही वरण किया है। बावजूद इसके, भारतीय सेना ने किसी पर अपना बलात आधिपत्य को प्राप्त नहीं किया। फिर चाहे 71 के युद्ध मे अस्सी हजार सैनिकों के साथ जेनरल नियाजी द्वारा समर्पण की ही बात हो, कारगिल में  मृत पड़े पाकिस्तानी सैनिकों की लाशों की सम्मानपूर्वक विदाई हो या गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की लाशों की बात हो। सैनिकों के सम्मान का स्प्रिट भारतीय सेना का गहना हमेशा रहा है। 

अपनी सम्प्रभुता की रक्षा के लिए विश्व की सबसे ऊंची सीमा रेखा पर तैनात होने वाली भारतीय सेना को विश्व शांति के लिए जब भी आह्वान किया गया भारतीय सेना ने अपनी पूर्ण निष्ठा से कर्तव्यों का निर्वहन किया भले ही इसमें प्राणो की आहुति ही क्यों ना देनी पड़ी। 

संख्या बल में तीसरी और साहस में विश्व की सबसे बड़ी सेना के पराक्रम से वशीभूत होकर इजरायल अक्सरहाँ यह कहता रहता है की भारतीय सेना के पराक्रम से विश्वविजय प्राप्त किया जा सकता है।सेना अपने देश के परिवार का बरगद होता है जिसके गहरे छाँव के निचे सम्पूर्ण देश की जनता आशंका मुक्त रहती हैं।

 सभी को सेना दिवस की ढेरों शुभकामनाएं।

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