यह तस्वीर मुझे हर बार गुजरे हुए वक्त की याद दिलाता रहता है। तस्वीर में एक रास्ता है जिसपर चलते लोगों की तरह वक्त भी सरपट भागता रहता है,आदमी पीछे खड़ा वहीं देखता रहता है और सब कुछ एक झटके में बीत जाता है। पहला और अंतिम सवार साइकिल पर हैं और बीच के लोग मोटरसाइकिल पर। जीवन के वक्त की रफ्तार भी तो कुछ इसी तरह होती है। लेकिन इस तस्वीर में जो एक चीज नहीं है वो रास्ते का यूटर्न है।
वक्त अक्सरहां लौट कर आता है और अपना हिसाब क्रूर तरीके से करता है। वक्त के हिसाब में कोई दयाभाव नहीं होता है। जो आप देते हैं वक्त वही लौटाता है। जो आप बोते हैं वक्त आपको वही काटने पर विवस करता है। अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा। बिल्कुल समानुपातिक!
बिता हुआ वक्त विनती, मिन्नत, फरियाद, दया, क्षमा जैसे शब्दों से अपरिचित दिखाई पड़ता है। और हाँ, वक्त अक्सरहां यूटर्न लेता है....
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