शुक्रवार, 29 मार्च 2024

अस्तित्व को लील जाने की उत्कट मनोरथ लिए हुए दैत्यों के अंतर्मन से भी अपने लिए आशीर्वाद प्राप्त कर लेना ही हनुमान हो जाना है।

अस्तित्व को लील जाने की उत्कट मनोरथ लिए हुए दैत्यों के अंतर्मन से भी अपने लिए आशीर्वाद प्राप्त कर लेना ही हनुमान हो जाना है।

बजरंगबली जब लंका, सिया सुधि लेने निकले तो सबसे पहले उनका सामना सुरसा नामक राक्षसी से हुआ जो हनुमान को निगलने को आतुर थीं। हनुमान जी ने विनती की। नहीं मानने पर उसके दिए गए शर्तों पर ही उसे पराजित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया:-

"राम काजु सब करिहहु, तुम बल बुद्धि निधान।
आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान"

हनुमान जी आगे बढ़े। लंका प्रवेश करने के लिए अति सूक्ष्म रूप धारण करने पर भी उनका सामना लंकिनी नामक राक्षसी से हुआ। लंकिनी हनुमान जी के हाथों  पराजित हुई और आशीर्वाद दिया:-

"प्रबिसि नगर कीजे सब काजा,हृदय राखि कोसलपुर राजा।"

सीता माता की सुधि लेने के लिए बजरंगबली जब पेड़ की छावं में बैठे तब तब त्रिजटा नामक राक्षसी ने हनुमान जी की प्रशंसा करते हुए यह कहा था कि आप चिंता मत कीजिये। मैंने सपने में देखा कि एक विशालकाय बन्दर आया है जो लंका को तहस नहस कर देगा:-

"सपनों बानर लंका जारी , जातुधान सेना सब मारी"

लंकापति रावण अपने अहंकार के वशीभूत बजरंगबली को अंग भंग कर वापस राम के पास भेजना चाहते थे और बजरंगबली के पूँछ को आग भी उसने इसी कारण लगाया  था। लेकिन जब बजरंगबली ने सम्पूर्ण लंका को जला दिया तब रावण यह कहने पर विवस हुआ कि :-

"हम जो कहा यह कपि नहीं होई, बानर रूप धरें सुर कोई"

आपके आस पास भी तो कई हनुमान रहते हैं। जो बजरंगबली तो नहीं लेकिन उनके स्वभाव जैसे होते हैं। उन सभी बजरंगबली को प्रणाम 🙏🙏

क्रमशः....

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