याद है ना आपको 2019 का विम्बलडन ? विम्बल्डन के इतिहास में सबसे लम्बे, 4 घंटे 57 मिनट तक चले इस मुकाबले में डिफेंडिंग चैम्पियन जोकोविच ने फेडरर को हरा कर सेंटर कोर्ट पर अपना वर्चस्व जारी रखा था. फेडरर ने इस मुकाबले को जितने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया, बावजूद इसके जोकोविच के सामने वे टिक नहीं पाए थे. लेकिन इतिहास की हमेशा पुनरावृति हो ऐसा जरूरी तो नहीं !.
कल का मुकाबला भी लगभग 4 घंटे 50 मिनट तक चला. 2019 वाले से मात्र 7 मिनट ही कम. लेकिन इस मुकाबले में जोकोविच अक्सर संघर्ष करते नजर आये. पहले सेट्स को हारने के बाद दुसरे सेट्स में अल्क्राज ने जब धमक के साथ वापसी किया, जित का खाका उसी सेट में निर्धारित हो गया. ऐसा नहीं था की जोकोविच यह नहीं जान रहे थे. उन्होंने लय में आते हुए अल्क्राज के ध्यान को तोड़ने के लिए छद्म का भी सहारा लिया और 7 मिनट के लम्बे समय के लिए बाथरूम ब्रेक तक ले डाला. लेकिन अल्क्राज को जैसे इन सब बातों से कोई सरोकार ही नहीं था. वे तो आज जितने के लिए ही कोर्ट में उतरे थे. एकाग्र और स्थिरचित्त होकर.
जोकोविच ने टेनिस के दीर्घ अनुभवों से अर्जित अपने सभी तिलिस्मी शॉट्स को अल्क्राज के विरुद्ध प्रयोग किया लेकिन अल्क्राज के खेल कौशल के सामने वो सब निष्फल होते रहे. जोकोविच के फोरहैंड और बैकहैण्ड शॉट्स का तिलिस्म टूटता रहा और वे अधीर होकर उग्र होते गए. खेल के अंतिम दौर में पहुंचते-पहुंचते जोकोविच की उग्रता उस सीमा तक पहुंच गई कि वे फिर से मैदान पर रेकेट पटकते हुए नजर आने लगे.
अपने उम्र जितने लम्बे टेनिस करियर और पहाड़ जैसे अनुभवों को समेटे जोकोविच के सामने युवा अल्क्राज की विलक्ष्ण प्रतिभा का दीप्त चमकता रहा और जोकोविच जैसे धूमिल होते रहे. 2002 से चार लोगों के इर्द-गिर्द (फेडरर, नडाल, जोकोविच और एंड्री मरे) घूमते हुए विम्बलडन को नया-नवेला और युवा चैम्पियन मिला. जो प्रतिभा का विलक्ष्ण भी है और संयमित भी.
अमूमन खेल के अंतिम समय तक हार नहीं मानने वाले जोकोविच “प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन सिरोमनि” तक पहुंचते-पहुंचते भावुक हो गए. अपने बेटे को देखकर फफकते हुए जोकोविच ने यह माना की आज का दिन उनके लिए अच्छा नहीं रहा लेकिन अगले ही क्षण उन्होंने अल्क्राज के खेल और उनके टीम के एफर्ट्स की प्रशंसा करते हुए यह साबित किया की बेशक खेल के दौरान उनमे प्रतिद्वंदियों के लिए सम्मान की कोई जगह नहीं रहती है लेकिन कोर्ट के बाहर वो एक बेहतरीन इन्सान हैं ........
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें