शनिवार, 22 जुलाई 2023

बटालिक युद्ध क्षेत्र- ग्यारवीं गोरखा राइफल्स - कर्नल ललित रॉय - कैप्टन मनोज पांडेय और खलुबाग टॉप...

कर्नल ललित रॉय ने अपने बाकी बचे साथियों को गिना। चार सौ जवानों की नफरी से शुरू हुए इस अभियान में अब केवल 60 जवान ही ऐसे बचे थे जिन्हें लेकर आगे बढ़ा जा सकता था। कर्नल रॉय ने इन्हें दो टुकड़ियों में बाँट कर 30 जवानों की एक टुकड़ी को लेफ्टिनेंट मनोज पाण्डेय के नेतृत्व में खलुबार टॉप पर बने पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त करने के लिए बायीं तरफ से आगे बढ़ने का आदेश दिया और बाकी बचे 30 जावनों को लेकर दाहिनी और से बढ़ने का निर्णय लिया।  

कैप्टन मनोज पांडेय की शौर्य कृतियों का स्वर्णिम इतिहास यहीं से शुरू होता है। पाकिस्तानियों की तरफ से आती हुई बर्स्ट फायर, स्प्लिन्टर्स की बौछारें और बारूदों के गुबारों से बेख़ौफ़ मनोज पांडेय की टीम पाकिस्तानियों के गर्दनों को दबोचने खलुबार टॉप की तरफ आगे बढ़ रही थी।

टीम के सभी सदस्यों के वाटर बोटल में भरे बर्फ के टुकड़े जिन्हें प्यास बुझाने के लिए रखा गया था अब तक खत्म हो चुका था। अब यहाँ आस-पास जो भी बर्फ था उनपर बारूदों की चादरें बिछी हुई थी जिनसे प्यास नहीं बुझाया जा सकता था। हालांकि मिशन के शुरुआत में ही उन्हें इन सब परिस्थितियों का आभास था,उनके लिए यह कोई नई बात नहीं थी।वे जानते थे कि उनमें से कई लौट कर वापस भी आना चाहते हैं परन्तु वो लोग इस बात से कभी विचलित नहीं थे कि ये सफर मुश्किलों भरा था। कैप्टन मनोज पांडेय ने अपनी डायरी में लिखा था:- "सम गोल्स आर सो वर्दी, ईट्स ग्लोरियस इवन टू फेल"। 

शाम ढल चुकी थी। पश्चिमी आकाश में आज कोई यज्ञ कुंड भभक उठा था। कैप्टन मनोज पांडेय और उनके साथियों के शौर्य की समिधा उस यज्ञकुंड की अग्नि से पाकिस्तानी सैनिकों को भष्मीभूत करने को उतारू थीं। दुश्मनों का पहला बंकर सामने था। कैप्टन मनोज पांडेय ने ग्रेनेड के पिन को निकाल कर पाकिस्तानी बंकर की और हवा में उछाल दिया था। ग्रेनेड निर्दिष्ट जगह पर पहुंच कर अपना काम कर चुका था। यज्ञ कुंड भभक उठा था।

एक तरफ़ मनोज पांडेय की अतुलित बल गाथा, अपराजेय शौर्य और चमकती खुखरी के संत्रास से भयभीत पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय बंकरों से भागना शुरू कर दिया वहीं दूसरी तरफ कर्नल ललित रॉय, चोटियों पर चढ़ते हुए पाकिस्तानी सैनिकों के अंधाधुंध आर्टलरी और गोलियों के झंझावात में फंस गए थे। रॉकेट लॉंचरों की आर्टलरी और एयर डिफेंस गनों की गोलियों की ताबड़तोड़ फायरिंग में आगे बढ़ते हुए टीम के वीर योद्धाओं की गिनती क्रमशः कम होते जा रही थी। 

कर्नल लिलित रॉय ने टीम के बाँकी बचे साथियों को गिना। तीस लोगों से शुरू हुए अभियान में अब मात्र छः वीर योद्धा ही शेष थे जिन्हें लेकर आगे बढ़ा जा सकता था। पाकिस्तानी रेंजर्स अब तक कर्नल ललित रॉय के लोकेशन को ट्रेस कर चुके थे। कर्नल ललित रॉय ने अपने ऐमुनेशन पाउच के बाकी गोलियों को गिना। टीम के पास मुश्किल से दस मिनट तक की लड़ाई के लिए ही गोलियां शेष थी। 

कर्नल ललित रॉय ने ऐमुनेशन पाउच से दो गोली निकाल कर उसे अपने पिस्टल में लोड कर लिया। रॉय आगे कहते हैं, उन्हें किसी भी हालात में पाकिस्तानीयों के हाँथों जिंदा नहीं पकड़ाना था। युद्ध क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों के दौरान अपने लिए अंतिम गोली भी संचित करने वाला धनवान की श्रेणी में आता है......

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