नवम्बर लौटने का महीना है। किसान खेतों में लौट रहे हैं। बाहर मजदूरी करने गए लोग फिर से गाँव लौट रहे हैं। ठंढ भी अब धीरे-धीरे लौटने लगी है। गाँव के बड़े तालाब में साइबेरियन पक्षी फिर से लौटने लगे हैं। टूटे हुए खलिहान को सँवारने, महिलाएं खलिहान लौट रही हैं और लौट रहा है धान का सुनहला रंग।
धान की कटाई अब शुरू हो गई है। कोरोना के संत्रास के बीच किसानों के लिए सुखद यह कि इंद्रदेव की कृपा से इस साल की उपज ठीक होने वाली है।
बिहार चुनाव सम्पन्न हो गए हैं। एक्जिट पोल आने लगे हैं। बैठकों की बतकही में इन मुद्दों ने भी अपना जगह घेर रखा है। लेकिन किसानों को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। वो धान की बालियों को देखकर अपने हिसाब से उपज का एक्जिट पोल निकालते हैं और उससे होने वाली कमाई को सोचकर मुस्कुराते हुए फसल पर हंसिया चलाते हैं....
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