माता रानी की प्रतिमा के विसर्जन के साथ दुर्गापूजा का समापन हो चुका है। इस साल के दुर्गापूजा का उमंग कोरोना के कारण फीका-फीका सा रहा यहाँ। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत प्रसाशन के आदेशानुसार पंडाल नहीं बनाये गए थे, रावण दहन का कार्यक्रम भी आयोजित नहीं किया गया था। सब कुछ सादा-सादा सा ही खत्म हो गया।
ये अलग बात है कि मधुपुर विधानसभा के निर्वाचित जनप्रतिनिधि के आकस्मिक निधन के कारण, खाली हुए इस विधानसभा में उपचुनाव जल्द ही होने वाले हैं। उस समय रेलियाँ भी होंगीं, सभाएं भी आयोजित की जायेंगीं और भीड़ तो इक्कट्ठा होगा ही। अब चुनाव में कोरोना को भाव देता ही कौन है। बिहार में ही देख लीजिए।
ख़ैर अब जो है सो है। फिलहाल मैं बहन घर से आये हुए बालूशाही का आनन्द लेते हुए यह सोच रहा हूँ की देवघर का पेड़ा ही केवल मशहूर नहीं है। पांडे दुकान का बालूशाही का भी अपना ही स्वाद है....
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