गुरुवार, 2 जुलाई 2020

दौड़ का इतिहास और उसेन बोल्ट....

आदमी अनादि काल से दौड़ता रहा है। सभ्यता के विकासपूर्व में मनुष्य भोजन की तालाश में दौड़ता था और सभ्यता के उत्तरार्ध में अब भी इसकी दौड़ जारी है।
एक सैनिक ने ऐसी ही दौड़ ईसा से 490 ईस्वी पूर्व, युद्ध मे जीत की खुशखबरी को अपने राजा तक पहुँचाने के लिए "मैराथन" से "एथेंस" तक बिना रुके ही लगाया था।
समय के साथ उस सैनिक की किंवन्दतियाँ भी आगे बढ़ती गयीं और अंत मे उसके सम्मान में दुनियाँ भर में दौड़ प्रतियोगितायें आयोजित होने लगीं। प्रतियोगिता शुरू हुआ तो सर्वश्रेष्ठ धावकों (जिसकी सूची काफी लंबी है) ने अपनी कीर्ति को स्थापित कर नए-नए कीर्तिमान बनाये। एक बनाता तो दूसरा उसे तोड़ उससे भी श्रेष्ठ कीर्ति स्थापित करता। समय आगे बढ़ता गया और सर्वश्रेष्ठ धावकों की सूची लम्बी होती गई।
मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ धावक के रूप में पहला नाम जमैका के "असफा पॉवेल" थे। इसमे कोई दो मत नहीं है कि इनके पहले भी कई दिग्गजों ने अपनी कीर्ति यहाँ स्थापित की थी। लेकिन, पढाई के दौरान मेरे द्वारा किसी धावक का पहला परिचय पॉवेल ने उस समय कराया था जब उन्होंने 2005 में 100 मीटर रीले को 9.77 सेकेंड में दौड़ कर विश्वखेल जगत में अपना झंडा लहराया था।
पहला परिचय लोगों को बहुत दिनों तक याद रहता है इस कारन पॉवेल आज भी मुझे प्रिय हैं। फिर जस्टिन गैटलिन आ गए। कुछ दिन रुके और डोप टेस्ट में फेल होने के बाद कहीं नेपथ्य में गुम हो गए। अब बोल्ट आ गए थे। "उसेन सेंट लियो बोल्ट"। बोल्ट आये, रफ़्तार के आश्चर्यजनक कीर्तिमान को स्थापित किया और अपने कैरियर के उत्थान पर विराजित रहते हुए ही 2017 में इस खेल से विदा ले लिया। पॉवेल मेरे प्रिय रहे हैं लेकिन बोल्ट जैसा कोई नहीं !
कार्ल लुइस से क्षमा याचना के साथ......
(तस्वीरें इंटरनेट से ली गई हैं। बांयें से क्रम में पॉवेल, गैटलिन और बोल्ट हैं)


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