प्रेरनादायी है यह बचपन ।।
वह उठता है, चलता है, चलने की कोशिश में गिरता है, गिरते हुए फिर उठता है और तब तक शतत् प्रयासरत रहता है, जब तक वह निर्बाध रूप से दौड़ने नहीं लगता है । अपने लक्ष को पाने की उत्कट इच्छाशक्ति नींद में भी उसके नन्हें पैरों को चलाते रहने के लिए आदेशीत करता रहता है ।
वह क्षमा करता है बेसर्त, खुशियाँ देता है हर वक्त, क्षमा मानो उसके स्वभाव में रचा-बसा है । एक मुस्कान भी प्रयाप्त सा है उसके विरूद्ध हर अपराध के एवज में । कहते हें ईश्वर के बनाए 36 गुणों में क्षमा का स्थान सर्वोपरि है जिसे वह अपने करीब रहने वालों को ही प्रदान करता है ।
वह सबको प्यार देता है बिना किसी अभिलाषा के और सबसे प्यार लेता है बिना किसी आकांक्षा के ।
हम आप सभी के बीच रहते हुए नन्हा सा जान जिसे आप छोटकु, बाबू, बेटु और ना जाने कितने नामों से पुकारते हैं, प्रेरणा का ऐसा दीपक है जो अपने निश्छल, निर्मल प्रकाष से आपको नित -निरंतर प्रकाषित करते हुए , सरल, सहज, निश्छल, निष्कपट और मासूम बने रहते हुए लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है जिसे हम बढते उम्र, धन, पद और प्रतिष्ठा के साथ ना जाने क्यों और किसलिये छोडते जाते हैं ।
किस बात का है ताना -बाना ।
एक दिन तुझे तो एक दिन मुझे भी जाना ।।
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