कर्मण्येवाधिकारस्ते सर्वभौम है, लेकिन ऐसा अक्सर ही होता है कि जब सभी परिस्थियां, सभी नक्षत्र, सभी हितैषी एक सीध में आपके पक्ष में खड़े हों तब किसी अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है। छत्तीस वर्षों के अंतहीन प्रतीक्षा में व्यग्रता से खड़ा अर्जेंटीना के लिए आज का दिन ऐसा ही रहा।
उत्साह,अनुशासन और जीत की भूख को समेट कर, अपने निर्धारित समय से ढेड़ गुने अधिक समय तक चलता हुआ यह खेल शुरुआती 60 मिनट तक मैसी के सम्मोहन में वशीभूत होकर उसी के इर्द गिर्द फुटबॉल की तरह घूमता रहा।
एक जादूगर जैसे जैसे बूढा होता जाता है उसके सम्मोहन की माया का मायाजाल उतना ही व्यापक और सघन होता जाता है। मैसी के ड्रीब्लिंग,पास,और गोल पोस्ट पर दागे जा रहे शॉट्स के आकर्षण का मायाजाल आज दर्शकों पर ठीक वैसा ही काम कर रहा था और मंत्रमोहित होते दर्शकों का समूह ड्रम बजाते हुए खुशी से रोते जा रहे थे। अर्जेंटीना का राष्ट्रध्वज हर तरफ उन्मत्त होकर लहरा रहा था।
खेल के 60 वें मिनट के बाद अर्जेन्टीना सुस्त हो चली थी। अघाई बिल्ली की तरह। खिलाड़ियों के पास की तरम्यता अब टूटने लगी थी। शुरुआती पेनाल्टी किक और एंजेल डी मारिया के दूसरे गोल के बदौलत जीत के प्रति आस्वस्त अर्जेंटीना का जादू खेल के 74वें में जैसे बिफर सा गया। समर्थकों के नाद और करतल स्वर की ध्वनियाँ जैसे स्तब्ध सी हो गई। इस विश्वकप के सनसनी माने जा रहे ऐमबापे ने एक के बाद एक, दो लगातार गोल दागकर अर्जेंटीना के पैरों तले जमीन को अपनी और खींच लिया।
2014 के विश्वकप के गोल्डन बॉल के विजेता रहे मैसी के जादू का तिलिस्म जैसे दरकता हुआ दिखाई पड़ने लगा। खेल 90 मिनट तक पहुँच कर 2-2 की बराबरी पर आकर वहीं रुक गया था जहाँ से इसकी शुरुआत हुई थी। बीच मे जो कुछ भी होता रहा,अब सब कहने सुनने की बातें मात्र थी। अगले 15 मिनट के अतिरिक्त समय मे फ्रांस का आक्रमण तेज तो हुआ लेकिन नतीजा वहीं का वहीं खड़ा रहा। शून्य पर।
बोर्ड पर 15 अतिरिक्त मिनट का और समय जोड़ा गया। थकावट और दबाव के बीच चलते हुए खेल में मैसी के ड्रीब्लिंग का जादू एक बार फिर से चला, अर्जेंटीना को पुनःबढ़त मिली लेकिन ऐमबापे द्वारा दागे जा रहे अकाट्य पेनाल्टी शूटआउट ने खेल को फिर से बराबरी पर खड़ा किया। मैच पेनाल्टी शूटआउट तक पहुँची और परिणाम सबके सामने है।
मैसी के 2006 से चली आ रही अंतहीन प्रतीक्षा को जैसे अपनी मंजिल प्राप्त हुई। उसे फिर से गोल्डन बॉल की उपाधि का हकदार घोषित किया गया और विश्वकप की ट्रॉफी का भी। गोल्डन बॉल की ट्रॉफी लेते हुए उसने विश्वकप की ट्रॉफी को ऐसे चूमा जैसे एक माता प्रसूति गृह से निकलने पर अपने नवजात को चूमती है।जैसे एक प्रमी सालों प्रतीक्षा के बाद एक दूसरे से मिलने पर चूमते हैं। जैसे एक युद्धबन्दी अपने घर लौटने पर अपने बच्चों को चूमता है...
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