रविवार, 26 फ़रवरी 2017

डर बनाम मज़बूरी

डर बनाम मज़बूरी
(चेचरि पूल)

जब आपका गला सुखने लगता है , छाती भारी होने लगता है ,  हिम्मत एक क़दम आगे चल कर दो क़दम पीछे सरका लेता है , ज़मीन  आगे चलने लगती है और आप पीछे खिसकने लगते हैं । आप  हिम्मत की पीठ को हल्के हाथों से थप-थपाते हैं और कहते हैं तुम कर सकते हैं। 

अबे ! नहीं  होगा मुझसे यार ! हिम्मत आपके हाथ को झिड़कते हुवे जवाब देता है ।

देखो  बाकि लोग भी कर रहे हैं , तुमसे दुबले , तुमसे छोटे , तुमसे मोटे  , औरत और बच्चे भी ! 

अनपढ़ हैं सब के सब गँवार हैं  , कोई अपना दिमाग़ नहीं लगा रहा है  , जान जोखिम में डालना कोई हिम्मत का काम है ! देखो तो  पैर कैसे फ़िसल रहा है , गिरे तो गए । मरना तय है ।

अबे देख यार वो 8 महीने की गर्भवती महिला अपने तिन साल के लड़के को गोद में उठा के अपना संतुलन बनाये इतने आत्मविश्वास के साथ आगे बढे हुवे आ रही है , फ़िर तुम तो फिट फोर हो ।

हिम्मत मुँह चिढाता है  , उसके मर्दाने अहम के गालों पर यह ज़ोरदार चाटा  था । अपनी सारी हिम्मत बटोर कर हिम्मत आगे बढ़ता है ।

"चेचरि पूल " पर उसके पड़ते हुवे क़दम से उठते आवाज़ और पूल में उठे कंम्पन्न को नजरअंदाज करते हुवे अब वह बीचो- बिच था , पानी की तेज़ बहाव पर नजरें गयी  । वह सन्न सा रह गया , डर विकराल जाल लिए उसे चारों ओर से घेरने लगा था , पैरों में फ़िसलन ज़्यादा महशूस होने लगी थी । चार फ़िट का एकतरफ़ा रास्ता जिसका वज़ूद नदी के तेज़ बहाव के बिच बांस के बल्लियों के सहारे टिका हुवा था मरात्तक भय को जन्म दे रहा था । वह किमकर्त्तव्य विमूढ़ सा था , पीछे वह लोट नहीं सकता था और आगे जाने की हिम्मत उसमे बची नहीं थी ।
पूल में एकाएक कम्पन्न तेज उठने  लगी थी ।  पीछे क़रीब दस और लोग आ गए थे । जान बचानी थी तो आगे बढ़ना था । अब कोई स्पेस बचा नहीं था स्केप करने के लिए । टाईम था  डर पर हिम्मत के हावी होने का , और फिर कुछ वैसा ही हुवा , डर भागते हुवे भूत  की तरह  पीछे छूटता जा रहा था , जूते की फ़िसलन ग़ायब थी पूल स्थिर हो गया था । थोड़ी देर में उसके पैरों के निचे स्थिर ज़मीन थी ।

जीत डर के स्थाई हार पर अट्टहास करने लगा था । पीछे मुड़ कर चेचरि पूल पर लोगों को आते जाते गौर से देखा , हर चेहरा डर पर स्थाई जित की गवाही दे रहा था ।

फ़िर कुछ देर और विचार किया गया कहीं यह मज़बूरी तो नहीं ?
कौन आपने जीवन को जोखिम में डालता है , हिम्मत ने प्रचंड आवाज़ से उत्तर दिया !

अब आगे बढ़ने का समय था ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें