मंगलवार, 14 सितंबर 2021

आत्ममुग्ध जोकोविच की मलिन होती कृति

जोकोविच की व्यग्रता उनकी अर्जित ख्यातियों को मलिन करती रहती हैं। लय में खेलते आत्ममुग्ध जोकोविच दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों को रोमांच की सर्वश्रेष्ठ ऊँचाई पर पहुँचा कर उन्हें चकित तो करते रहते हैं लेकिन जोकोविच अपने प्रदर्शन के ढलान पर जब रहते हैं तब अक्सर ही अपनी अर्जित ख्यातियों को धूमिल करते रहते हैं। पराभूत होते हुए जोकोविच कभी नेट अम्पायर से उलझते हुए गालियां बकते हैं, लाइन अंपायर की तरफ गेंद को उछालते हैं और अमूमन रैकेट तोड़ते हुए अपने प्रशंसकों के दिलों को दुखाते रहते हैं।

निःसन्देह जोकोविच वर्तमान ऐरा के दुर्जेय टैनिस प्लेयर हैं। लेकिन उनका अक्खड़ स्वभाव, जिसके दम पर जोकोविच ने टेनिस जगत में धुरंधरों के बीच अपने नाम का खूँटा गाड़ा है, वही स्वभाव ही उनके कीर्ति को निस्तेज करता रहता है। 

यह हो भी क्यों नहीं? क्या एक क्रिकेट प्रसंसक के चित्त को यह कभी स्वीकार्य होगा कि सचिन/धोनी/विराट शून्य पर आउट होने के बाद, आवेग में बल्ले को हवा में उछाले या जमीन पर दे मारे? क्या एक फुटबॉल प्रेमी का अंतर्मन इस बात की स्वीकृति प्रदान करेगा कि मैसी/नेमार/रोनाल्डो पैनल्टी शूट आउट के दौरान गोल से चूक जाने पर फुटबॉल को दांतों से काटने लगे या दर्शकों की तरफ पूरे आवेग से किक दे मारे? क्या इस बात की कल्पना की जा सकती है कि आसफा पावेल/ जस्टिन गैटलिन/ उसेन बोल्ट दौड़ की प्रतियोगिता में हार जाने पर आवेग में अपने जूते को दर्शकों की तरफ उछाल दे? 

जोकोविच ने जिस परिपाटी को शुरू किया है यह अब नए खिलाड़ियों में भी देखने को अमूमन मिलता है। जोकोविच टेनिस के  प्रतिष्ठित नाम हैं और प्रतिष्ठित लोगों का अनुकरण नए लोग अक्सरहां करते रहते हैं। एक दर्शक, एक प्रसंसक अपने पसंदीदा खिलाड़ी से ऐसी अपेक्षा कतई नहीं रखता है...