रविवार, 16 अगस्त 2020

मैं पल दो पल का शायर हूँ...

धोनी कल रिटायर्ड हो गए। एक छोटे से इंस्टाग्राम वीडियो के मार्फ़त धोनी ने लोगों को बताया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से सन्यास ले लिया है। उनके प्रशंसकों कि यह चाह थी की धोनी अपना आख़री मैच मैदान पर खेलने उतरते और सम्भवतः यह भी तमन्ना कि वो विजयी छक्के से अपनी अंतिम पारी को घोषित करते! लेकिन धोनी ने हमेशा सम्भावनाओं से आगे बढ़कर खेल खेला है। रिटायरमेंट का उनका यह मास्टरस्ट्रोक भी शायद उसी खेल का आखरी हिस्सा रहा हो। 

लम्बे बालों वाले हेलीकॉप्टर शॉट के जनक के रूप में प्रसिध्दि प्राप्त करने वाले खिलाड़ी से कैप्टन कूल तक का उनका सफर क्रिकेट प्रशंसकों के लिए हमेशा ही हर्षदायक रहा। बतौर कैप्टन, गाँगुली से प्राप्त भारतीय क्रिकेट टीम की विरासत (द्रविड़ को छोड़ते हैं) को धोनी ने उन सभी क्षेत्रों में इनरीच किया जिसकी कमी से भारतीय टीम जीत के आखरी लम्हों को भुना पाने में असमर्थ रह जाती थी। 

यह सब इतना आसान भी नहीं था। आईसीसी के सभी तीनों ट्रॉफियों को जीतने वाले कैप्टन कुल ने क्रिकेट में कभी निज स्वार्थ के लिए जगह नहीं ढूंढा। जीत को जब भी धोनी की जरूरत पड़ी धोनी ने उसी अनुरूप अपनेआप को वहाँ फिट करने का सफल प्रयास किया। 

खेल के आखरी गेंद तक पराजय की रथ को विजय जुलूस के पथ पर मोड़ देने वाले महेंद्र सिंह हमेशा ही आस पास की परिस्थितियों से सांत्वनाशून्य भाव लिए ही अपने आप को परिचित करवाते रहते थे। फिर वो विश्वकप का विश्वविजयी छक्का हो या पिछले विश्वकप के सेमीफाइनल में रन आउट होकर पेवेलियन लौटता धोनी हो। धोनी जब बहुत गदगद होते थे तब थोड़ी मुस्कान अपने चेहरे पर बिखेरते थे पर दर्शकों की स्मृति में विरले ही ऐसी घटना अंकित हुई हों जब धोनी ने शतक लगा कर भुजाओं को लहराते हुए अपना दम्भ प्रदर्शित किया हो।

कैप्टन कूल का क्रिकेट को छोड़ना एक ऐसा वैक्यूम है जिसे शायद धोनी ही पूरा कर सकते हैं..