मंगलवार, 21 अगस्त 2018

वृद्धाश्रम

दादी और पोती की वृद्धाआश्रम वाली तस्वीर सुबह से ट्रेंड ही पर है औऱ भावुक करने वाली भी ।

शहर और शहरी संस्कृति में रमे लोगों के लिए अब ये आम बात हो गई है । अमूमन शहरों की औसत साक्षरता दर अधिक होती है । जब लोग ज्यादा पढ़ लिख लेते हैं तो उन्हें अपने सभ्य होने का एहसास होने लग जाता है । और जब लोग सभ्य हो जाते हैं तो उनके सोचने का दायरा बढ़ जाता है । उनकी पहली प्राथमिकता खुलेपन की होती है । (मैं यहाँ अभद्र नहीं होना चाहूंगा) ।

समय के साथ परिवार बढ़ता है लेकिन जो नहीं बढ़ता है वो रहने का स्थान (स्क्वायर फीट में )और घर की चारदिवारियाँ । पहले स्थान पर विराजमान खुलापन और स्वछंदता अपने और अपने लोगों की आहुति मांगती है और आहुति दे दी जाती है ।

और फ़िर मर जाते हैं ऐसे अनमोल रिश्ते जो बेमोल हैं । शुक्रिया इन सब बातों से गावँ-घर के लोगों को कोई सरोकार नहीं है । गावँ आज भी बचा हुआ है इस प्राणघातक महामारी से ।